Tuesday, January 11, 2011

Madhya Pradesh - Beautiful.

सच में मध्य प्रदेस सुंदर है | मेने तो २८ साल नोकरी की है वहा`| अब तो सडक भी अच्छी हो गयी है | उस समय और आज में बहुत अंतर है | आने जाने के साधन अच्छे नहीं, टूटी फूटी सड़के, पर्यटन स्थलों की हालत अविकसित और कोई विशेष ध्यान नहीं था पर्यटन की तरफ | पर्यटन निगम की स्थापना हुई १९७८ में एक छोटी सी धन राशी एवं सीमित साधनों के साथ | और प्राम्भ हुआ विकास का काम | बहुत परिश्रम किया सभी ने, अधिकारी व कर्मचारी सभी लगे रहे अपने अपने काम में | हमारे निगम के प्रत्येक प्रबंध निदेशक जो भी आये सभी ने रात दिन कान किया | हम लोग आगे चलते गए और हमारा कारवां मजबूत बनता चला गया | सरकार ने विशेष ध्यान देना प्राम्भ कर दिया | बीच में कुछ समय ऐसा आया कि हमें लगने लगा कि कुछ ठीक नहीं हो रहा है | निरंतर घाटा हो रहा था | स्थिति ऐसी हो कि सरकार ये सोचने को विवश हो गयी कि इस निगम का क्या करे ? और अंत में फैसला लिया गया कि पर्यटन निगम को बंद कर दिया जाए | इसकी कार्यवाही भी होने लगी | ये ऐसा समय था कि हर तरफ चिंता का विषय बन गया |
ऐसी विकट परिस्थिति में कई प्रबंध निदेशक आ कर चले गए और अपनी ओर से भरसक कोशिस की कि इस निगम को घाटे की स्थिति से उभार दिया जावे | परन्तु फिर भी बंद तो नहीं होने दिया निगम को |
अब आया २००४ का वर्ष, एक नए प्रबंध निदेशक आये ओर उनका नाम है श्री अश्वनी लुहानी | क्या सोच थी उनकी ! पहले वर्ष में ही दिशा बदल दी | तेज रफतार से विकाश होने लगा | नए नए प्रयोग होने लगे | काम करने वाला हर कर्मचारी में नया जोश भर गया | ये प्रबंध निदेशक अपने से लगने लगे | सब कुछ भिन्न था | ओर पहले ही वर्ष में निगम लाभ में आ गया | श्री अश्वनी लुहानी जी एक वर्ष के लिए कुछ कारणों से निगम से बहार चले थे | ऐसा लगा कि कोई अपना बिछड़ गया है | एक वर्ष बाद् २००६ में फिर निगम आये, हम लोगो के प्यार ने मजबूर कर दिया उनको आने के लिए | काम कि रफ़्तार तो हम में बनी हुई थी पहले वाली | होने लग्गा चारो तरफ विकास ही विकास | सादे चार साल ज्यादा रहे दुबारा | विकास की सूचि बहुत लम्बी है यहाँ पर सब कुछ लिखना मुस्किल है | हिन्दुस्तान को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को हिदुस्तान का दिल दिखा दिया लुहानी जी ने | पर्यटन की परिभाषा ही बदल कर रख दी | हर विकास को पर्यटन से जोड़ दिया | विकास, विकास, विकास ओर सिर्फ विकास | एक स्वर्ण युग दे कर श्री अश्वनी लुहानी अपने पैत्रिक विभाग रेलवे में दिल्ली चले गए दिसम्बर २०१० में | हम ओर मध्य प्रदेस ही नहीं बल्कि पूरा पर्यटन संसार नहीं भूलेगा आपको लुहानी जी | कई दर्जन अवार्ड दिलाये हमें और स्वयं अनेको अवार्ड से सुसोभित है आप | सतसत प्रणाम आदरणीय आपको | सादर नमन |
अब आये नए पर्बंध निदेशक श्री हरि रंजन राव जी फरवरी २०१० में | बहुत ही मुस्कराहट वाले व्यक्ति, पहली मुलाकात में दिल जीत लिया सबका | पहेले वाली रफ़्तार को पकड़ा, वो ही नीतिया अपनाई ओर कर्मचारियों को प्यार देना बराबर रखा | बाकि जो काम बचा था उसे आगे बढाया | श्री हरि रंजन राव जी भी अपने से लगते है जब मिलते है | लुहानी जी की कमी पूरी करते नजर आ रहे है | विकास की रफ़्तार और तेज हो गयी है | मेरा नमस्कार आपको माननीय |

(बदन सिंह चौहान - रिटायर्ड महा प्रबंधक "मध्य प्रदेस पर्यटन निगम" {मोबाइल नंबर 07827465334)