स्वच्छ भारत अभियान और और गांधी जी के रचनात्मक कार्यक्रम
इस शीर्षक पर गांधी गांधी शांति अभियान के अध्यक्ष प्रोफेसर एन राधाकृष्णन ने अपने लेख में स्वच्छता के बारे में इसको एक महत्वपूर्ण आवश्यकता को मानते हुए इसको अग्रसर बढ़ाने में जोर दिया है।
यह सामान्यतय विश्वास किया जाता है कि गांधीजी के दर्शन और दृष्टिकोण की ताकत, जीवन शक्ति और प्रासंगिकता इस आधार पर मापी जाती है जो कि उसका दर्शन इस प्रकार स्पष्ट किया गया है कि वह आध्यात्मिकता को शक्ति देता है और जो सामाजिक परिवर्तन की ओर ले जाता है।
अरिस्टोल- प्लेटो का एक नया विचार, श्री रामकृष्ण- विवेकानंद का आध्यात्मिक बंधुत्व, कार्ल मार्क्स -लेनिन की राजनीतिक एकजुटता आदि ...ये बहुत ही साहसिक और उच्च कोटि के उदाहरण है जिसने समाज में परिवर्तन लाने का कार्य किया । भारत में भूदान आंदोलन के माध्यम से विनोबा भावे के प्रयत्न गांधीजी के क्रांतिकारी अभियान को बढ़ाने में बहुत महत्वपूर्ण है चाहे वह थोड़े समय के लिए ही हो । आज यह माना जाता है कि गांधी जी का दर्शन अब एक शैक्षणिक संस्थाओं में एक विषय के रूप में ही रह गया है । और एक विशिष्ट व्यक्तित्व के रूप में उनकी स्तुति योग्य रह गई है परंतु दैनिक जीवन में उनका अनुसरण करना कठिन है।
गांधीजी के 150 वर्ष की जन्म शताब्दी ऐसी होनी चाहिए कि हम अपने अंदर गांधी जी को खोजें और समझे कि उनकी हमारे राष्ट्र को क्या विरासत दे गए हैं।
स्वच्छ भारत अभियान गांधीजी का एक स्वस्थ राष्ट्र के रूप में देखना था । हमारे देश में समय-समय पर इस अति महत्वपूर्ण विषय को अभियान के रूप में उठाया भी गया है । अब यह राष्ट्र के लिए जन आंदोलन के रूप में पूर्ण अभियान का रूप ले चुका है जो निचले स्तर से प्रारंभ करके भारत को स्वच्छ और स्वस्थ भारत बनाना है । हम भारतीयों ने गांधीजी के इस सपने को साकार करने के लिए शपथ भी ले चुके हैं । बापू गांधी जी के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि हम भारत को एक स्वच्छ भारत बनाए और इसके सफल बनाने हेतु समाज के हर वर्ग ने आगे बढ़कर निष्ठा से इस अभियान को अपने हाथों में लेकर बहुत ही अद्भुत कार्य करने का संकल्प लिया है।
गांधी जी ने कहा था मेरा जीवन ही मेरा संदेश है ।।
गांधीजी के विचार जैसे सर्व धर्म समानता, खादी का उपयोग, नशा मुक्ति, ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा, शिक्षा की अनिवार्यता, नारी का 'सम्मान, न्याय, स्वतंत्रता', स्वस्थ एवं स्वच्छ भारत, शिक्षित भारत, राष्ट्रीय भाषाओं को महत्व देना, आर्थिक समानता का विचार, ग्रामीण विकास, श्रमिकों का विकास, आदिवासियों का विकास, कुष्ठ रोग से मुक्ति और युवकों व छात्रों को जिम्मेदारी लेना .. ये मात्र दर्शन ही नहीं अपितु जीवन की एवम राष्ट्र को सुदृढ़ बनाने की मूल आवश्यकताएँ है।
आओ हम स्वच्छ भारत बनाएं।
जय हिंद।
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