Tuesday, December 2, 2025

 09/0/2000 गुरुवार झाँसी

मेरी स्कूटर से लम्बी यात्रा

माह फरवरी 2000 में मेरी बड़ी बिटिया की शादी थी 21/02/2000 को | इस समय मैं अपनी नौकरी पर झाँसी में पदस्थ हूँ | रेलवे स्टेशन झाँसी के प्लेटफार्म नंबर 1 पर एक छोटा सा काउंटर ऑफिस बना हुआ है | यही है मेरा ऑफिस मध्य प्रदेश पर्यटन का सूचना केंद्र | इससे में मेरी पदस्थापना हुई है, खजुराहो से | मुझे अब घर भी जाना था पलवल | बिटिया की शादी करने को | मेरी छुट्टी पारित हो कर आ गई है भोपाल से, जो कि समय पूर्व भेज दी गई थी | 06/02/2000 से 05/03/2003 तक की अवधि तक की है | अब यह है कि पलवल जाना है 05/02/2000 को |

मुझे यह बी निर्णय लेना है कि कैसे जाया जावे ? यह सोच रहा था कि स्कूटर को ले जाया जावे | मुझे वहां पर जरूरत पड़ेगी | लंबा रास्ता है लगभग 370 किलो मीटर होगा | मेरी पत्नी राजवती के द्वारा फ़ोन पर मुझे बार बार मना भी किया जाता रहा है कि स्कूटर से इतनी लम्बी यात्रा नही करना | मैं भी सोच रहा था कि इतनी लम्बी यात्रा नहीं करना चाहिए  मैंने रेलवे स्टेशन में पूछा कि झाँसी से पलवल तक का स्कूटर का कितना लगेज चार्ज लगेगा | जानकारी से पता चला कि स्कूटर ले जाने का लगभग 450 रूपये लगेगा | जो कि मुझे बहुत्र ज्यादा लगा | मैंने सोचा कि इतना अधिक खर्चा तो ज्यादा है | क्यों ना स्कूटर को चला कर ले जाया जाए ? बहुत ही सोच कर , निरंतर उसके लाभ हानि को समझ कर कि स्कूटर को चला कर ही ले जाया जाए या नहीं | मैंने निर्णय ले ही लिया कि स्कूटर चला क्र ही ले जाया जाए |

वह दिन आ ही गया जब मुझे झाँसी से स्कूटर से यात्रा करनी थी | मैंने ऑफिस में कार्य किया 1 बजे दोपहर तक | अपना वेतन लिया औ कुछ पैसा बैंक से निकाला | घर आ कर अपना सामान बांधा | बाज़ार से एक बैग खरीदा | उसमें सामान रखा और स्कूटर के पीछे बाँध दिया | मेरे झाँसी में एक परिचित है श्री एन. पी. सिंह यू पी टूरिज्म में उप निदेशक हैं | उन्होंने भी हाँ कर दी कि जब मैंने उससे कहा कि वह भी आगरा जा रहे हैं | वह मेरे साथ झाँसी से ग्वालियर तक चले और वहां से ताज एक्सप्रेस ट्रेन पकड़ सकते हैं | उन्हें भी बड़ी उत्सुकता थी स्कूटर चलाने की – कुछ लम्बा चलाने की | इस प्रकार हम 2 बजे 05/02/2000 को हम दोनों ने स्कूटर से झाँसी से चलना शुरू किया | एन पी सिंह की स्कूटर चलाने इच्छा थी ही तो मैंने बिना उसके कहे ही मैंने स्कूटर उसको चलाने को दे दिया | इस बात से वह बहुत सम्मानीय महसूस कर रहा था | स्कूटर चलाना शुरू किया | बीच में एक जगह चाय पीने के लिए ठहरे 15- 20 मिनट | और ग्वालियर पहुंचे सायं के 5 बजने में 10-15 मिनट की देर थी | उसको ताज एक्सप्रेस ट्रेन में आगरा के लिए बैठाया | और मैं अपने बेटे के पास आ गया | मेरा बेटा इन दिनों ग्वालियर में रह रहा है | पिछले दो वर्षों से | F- 16 चेतकपुरी ग्वालियर में | झाँसी से ग्वालियर 100 किलो मीटर है | रात को अपने बेटे के पास ठहरा | दूसरे दिन पलवल जाना था | दूसरा दिन 06/02/2000 को पलवल के लिए तैयार हुए हम दोनों | हम का मतलब – मैं और मौनु मेरा बेटा | यह भी मैंने पहले से ही तय कर लिया था कि मौनु वाला स्कूटर भी पलवल ले जाया जाए | पुराना स्कूटर MP11-T 0542 मौनु को दे रखा है | मेरा भतीजा टिंकी भी इनदिनों ग्वालियर में रह रहा है | BPED कर रहा है जीवाजी यूनिवर्सिटी से | पिछली रात को मैं और मौनु ग्वालियर मेला घूमने के बाद उसके (टिंकी) कमरे पर चले गए | उसको (टिंकी) लिया और मौनु के कमरे पर ठहर गए थे | सुभाह लगभग 6.30 बजे मौनु का कमरा छोड़ा और पुन: टिंकी के कमरे से होते हुए स्कूटर से यात्रा शुरू की | मैंने नया स्कूटर अर्थात मेरा वाला जो मैं अपने पास क्झंसी में रखता हूँ – MP16C1492 मौनु को दिया चलाने को और मैं उसके पीछे बैठ गया | मौनु वाला स्कूटर टिंकी को दे दिया | इस प्रकार हमारी यात्रा शुरू हुई ग्वालियर से पलवल तक | यह 120+140 = २६० किलो मीटर की दूरी थी पलवल पहुंचे 4 बजे सायं को | रास्ते में एन पी सिंह के घर पर ठहरे कुछ घंटे | एन पी सिंह ने जलेबी और कचौड़ी का नास्ता कराया | 11 बजे पहुँच गए थे आगरा | एन पी सिंह आगरा में ये सर्किट हाउस के पास ऑफिसर्स कुआटार्स हैं उनमें रहते हैं |

रस्ते में स्कूटर चलाते चलाते थक गए थे बच्चे लोग और जो मैं पीछे बैठा था मैं भी थक गया था | मौनु का इतना लंबा स्कूटर चलना पहला अवसर था | 260 किलो मीटर स्चूटर चलना कम नहीं होता है टिंकी तो पहले भी चला चुका था 1994 में जब मेरा ट्रान्सफर हुआ था भेदाघट से बेढन | तो मैं और टिंकी गए थे स्कूटर से | सभी को खूब मज़ा आया स्कूटर की यात्रा करने में |  यह तो रही झाँसी – ग्वालियर – पलवल की यात्रा | और अब वापिस का विवरण इस प्रकार है |

मेरी छुट्टी समाप्त हो गई थी 05\03/2000 को | अ मुझे वापिस जाना था | दिनांक 06/03/2000 को मैं और मौनु स्कूटर को ले कर चल पड़े | मैंने पुराना स्कूटर MP11-T 0542 लिया और नया स्कूटर MP16C1492 मौनु को दे दिया | इस बार मैंने राजवती से कहा कि वह भी चले मेरे साथ  झाँसी तक | तो राजवती भी मेरे स्कूटर पर थी | हम 7.30 सुबह पलवल से चले | और स्कूटर में पेट्रौल पहले ही भरवा लिया था मौनु ने पहली सायं को | रस्ते में मित्रौल ठहरे | सडक पर ही | मैं और राजवती इन्तजार कर रहर थे | मौनु गया था मधु के घर  मित्रौल में ही मधु की ससुराल है | इस समय मधु ससुराल में ही थी | मौनु को मैंने भेजा था मधु के पास कि वह सड़क पर ही बुला कर उससे मिल लेंगें | दो दिन पहले भी मौनु को भेजा था मित्रौल कि मधु को ले आये या बाद में भेज दे कुछ दिनों के लिए | क्योंकि राजवती मेरे साथ झाँसी जाएगी तो लूसी (मेरी छोटी बिटिया) अकेली रहेगी घर में | मधु आ जाएगी तो दोनों बहने रह लेंगी | पहले तो भ्रेजा ही नहीं मित्रौल वालों ने | सोचा हम रास्ते में जाते समय मधुको पुन: कह देंगें तो पलवल चली जाएगी | परन्तु मधु की ससुराल है | अब मधु उनके अधीन है | मधु को मौनु स्कूटर पर बैठा कर ले आया सड़क तक हम लोगों के पास | ससुराल वालों ने यहाँ तक आने में भी कुछ रूचि नहीं दिखाई | किसी प्रकार आई | खुश थी मधु | पलवल जाने के बारे में कुछ अनभिज्ञता दिखलाई उसके ससुराल वालों ने | ये बात मधु| ने बताई हमें | हमने कहा मधु से कि अब आज चली जाना पलवल | परन्तु मधु से कहने से क्या फायदा   हम बात जी कर रहे थे कि इतने में मेरा दामाद वीर सिंह आ गया | दूसरे किसी स्कूटर से हमारे पास | मैंने उससे कहा कि यदि संभव हो तो मधु को एक सप्ताह के लिए भेज देवें पलवल | और घरवाले थोडा सा नाराज हैं एतराज करते हैं तो ना भेजें | हुआ भी यही | 06/03/2000 को लूसी को अकेला छोड़ा हमने कि मधु आ जाएगी ससुराल से, परन्तु मेरे कहने के पश्चात् भी तीन दिन तक नहीं भेजा मित्रौल वालों ने | यह हमें अच्छा नहीं लगा | हम मित्रौल से 8.30 सुबह चले | मैंने पुराना स्कूटर लिया | और मेरे साथ राजवती थी | और नया स्कूटर मौनु के पास | चल पड़े ग्वालियर – झाँसी के लिए | मथुरा से पहले मेरा स्कूटर पंचर हो गया | दो बार | अंततः मैंने 95 रुपये का नया ट्यूब ही खरीद लिया | तब जा कर बात बनी | आगरा तीन बजे पहुँच गए | और आगरा में हमें रस्ते में परेसानी आई | रास्ता भूल गया था
 सिकंदरा से आगे जो रास्ता रजा मंदी की तरफ सड़क जो मुडती थी तो उसको भूलवश छोड़ कर आगे निकल गए बाई पास हो कर सीधे जमुना पार चले गए | और तब मुझे निश्चय ही यकीन हुआ कि मैं रास्ता भूल गया हूँ  | शक तो मुझे हो रहा था कि सिकंदरा से आगे कुछ गड़बड़ हो रहा है मुझसे | जब जमुना नदी पार कर ली तो पार करने के बाद तब हम रास्ता पूछ कर दुबारा दुसरे पुल से जमुना पार करके आगरा किला पहुँच कर ग्वालियर रोड पकड़ कर तब थोड़ी सी तसल्ली हुई , आगे चलना शुरू किया | थकावट आ रही थी | मौनु का इतना अनुभव व आदत नहीं है स्कूटर पर इतनी लम्बी यात्रा करने की | वह थकान महसूस कर रहा था | हाँ एक बात जरूर है मौनु में मेरे से अच्छा स्कूटर चलाता है | और सहनशक्ति और धैर्य भी बहुत ज्यादा है  | मेरे में ना तो सहनशक्ति है और ना ही धैर्य है | थकान लग रही थी | मौनु को फिर भी चलाता जा रहा था | बीच कभी कभी रुकने कि भी कोशिश करते | परन्तु मैं चलने के लिए फिर कह देता | स्कूटर चल रहे थे कभी 50 की तो कभी 60 किलो मीटर प्रीटी घंटे की स्पीड से | रोड खराब होने की वजह से एक जगह मौनु का स्कूटर सड़क से नीचे चला गया कच्चे में, ठीक से नियंत्रण किया जा सका | बड़ी मुश्किल से सम्भाला उसने | उसके बाद कोई परेश्हानी नहीं आई | जो जो ग्वालियर नजदीक आता जा रहा रहा था, थकान बढ़ती जा रही थी | सीट पर बैठे बैठे नीचे से आग जैसा गर्म हो रहा था शरीर का भाग | मगर हम्चालते जा रहे थे | और अंततः ग्वालियर पहुँच ही गए – सायं के 5 बजे | ग्वालियर पहुँच कर मौनु के कमरे पर गए – F/16, चेतकपुरी | आधा घंटे रुके हम | चाय पी | माकन मालिक की पत्नीसे मैंने कहा चाय के लिए तो उसने बड़े ही स्नेह से चाय बनाई और मौनु उसके घर से ही अपने कमरे में ले आया चाय को | मुझे और राजवती को झाँसी आना था | अब 5.30 बज चुके थे सायं के |  तो मैंने अब अपना स्कूटर लिया नया वाला MP16C1492 लिया और फिर मैं और राजवती ने यात्रा शुरू की | बस ग्वालियर से चलते दसमी ही पेट्रौल रिज़र्व लग गया | और उसमे तीन लीटर पेट्रौल डलवाया | अभी मैंने उसका मीटर भी नोट किया कि कितने पर रिज़र्व लगा है | मीटर में 3271 km था जो मैंने नोट कर लिया | थक तो हम भी चुके थे | पीछे बैठा आदमी भ कम नहीं थकता है | राजवती भी बुरी तरह थक चुकी थी | परन्तु यात्रा तो करनी ही थी | दिन भी छुपता चला जा रहा था | ग्वालियर से 100 किलो मीटर की दूरी पर है झांसी | ढाई तीन घंटे लगेंगे | और चलते चलते दिन भी छुप गया | अँधेरा हो गया था | झाँसी में हम पहुँच गए रात को 8 बजे | सीधा ऑफिस आया | इस प्रकार पलवल से घर से 7.30 सुबह चल कर झाँसी तक यात्रा 360 किलो मीटर की यात्रा हमने लगभग 12 घंटे में पूरी की | पहले भी पहुँच सकते थे | हमारे लगभग तीन घंटे व्यर्थ हो गए थे | कहीं पंचर बनवाने | मित्रौल में ठहरने में और मौनु के पास भी आधा घंटा लगा ग्वालियर में | और लगभग एक घंटा आगरा में लग गया जब हम रास्ता भूल गए थे |

स्कूटर MP161492 नया स्कूटर मैं अपने पास झांसी में रखता हूँ

Metre No

Depart from Palwal      3990    

Arr at  Gwalior               4270     : 273 km

Arr at Jhansi                   4371      :101 km

 

Total 273+101: 374 Km

 

MP11CA0542 पुराना स्कूटर – मौनु के पास रहता है

Depat from Palwal  3754

Arr Gwalior               4024

Total                         270 Kilo Meter

पेट्रौल दोनों स्कूटर में

160 रूपये पलवल मे 05/03/2000

265 रुपये आगरा में 06/03/2000

टोटल : 160+265: 425 रूपये + 85 रूपये झाँसी ( इस प्रकार टोटल : 510 रूपये

 

 

     इस प्रका र रही हमारी स्कूटर की यात्रा | मौनु की यह प्रथम यात्रा थी – इतनी लम्बी | मैंने तो पहले की हैं लगभग 450+ 450 किलो मीटर की यात्रा – एक बार जब मेरा भेदाघट से बेढन हुआ था स्थानान्तरण | उस समय जबलपुर से  बेढन तक निरंतर टिंकी (मेरा भतीजा) ने स्कूटर चलाया | और उसके लगभग एक वर्ष पश्चात् जब मेरा स्थानान्तरण वापिस जबलपुर हुआ तो मैं अकेला चला कर बिना कहीं भी रुके) बेढन से चला 9 बजे सुबह और सायं को 7 बजे घर पहुँच गया | स

इसी प्रकार वर्ष 1985 में खजुराहो से सागर की यात्रा की थी, 200 किलो मीटर दूर है | बिना कहीं रुके | 

वर्ष 1999 में पुराना स्कूटर पहुँचाने हेतु, MP11A542 को खजुराहो से ग्वालियर तक स्कूटर चलाया मैंने |

यह एक साहसिक कार्य है      

 

                                                            

 

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